मेहनत के बाद भी असफल – आखिर क्यों?

Succes कोई accident नहीं होता कि हमने कुछ नहीं किया और हम सफल हो गए। हमे अपने सपनों को जिंदा रखना पड़ता है। अपने सपनों को पूरा करने के लिए दिन रात लगना पड़ता है।

दृढ़ता और पूरी लगन से हमे अपने लक्ष्य को पाने के लिए कई प्रयास करने होते है। तब जाकर निश्चित ही हमें हमारी मंजिल मिलती है।

Accordind to Tim Notke ” Hard Work beats Talent when Talent doesn’t Work Hard”

मेहनत करने के बाद भी असफल हो जाना, इसके पीछे क्या कारण है?

कमजोर मानसिकता

हमे बचपन से यही समझाया जाता है कि मेहनत से पढ़ाई करो। मेहनत से काम करो। जीत तुम्हारी ही होगी। क्या कोई कभी बोलता है जो तुम्हारा मन करे वो करो। अकेले मेहनत करने से क्या होगा वो तो मजदूर भी करता है।

मेहनत पूरी, खुशी अधूरी

आप कोई भी काम मेहनत से करेंगे पर उसे करने में यदि खुशी नहीं होगी तो क्या होगा?

मेहनत बेकार ही हो जाएगी ना! क्यूंकि वह काम करने में आपका मन नहीं है। आपको करना पड़ रहा है क्यूंकि दूसरो की आपसे अपेक्षाएं हैं। या फिर आपको किसी से आगे निकलना है।

सही तरीका

सिर्फ Hard work करने से कुछ नहीं होता, आपको Smartly work करना पड़ता है।
मान लीजिए आप किसी competition की तैयारी कर रहे है। अब क्या सिर्फ मेहनत करके आप पास हो जाएंगे?

नहीं, इसके लिए आपको अपना एक Time table बनाना होगा। पिछले साल के पेपर्स refer करने होंगे।

जल्दी याद हो जाए इसके लिए हर पेपर के pointers और format तयार करने होंगे। कुछ टॉपर्स को follow करना होगा। मतलब आपको planning करनी होगी और तब आप अवश्य ही सफल होंगे।

कर्म किए जा, फल की इच्छा मत कर

आज के जमाने में ये कह देना कि कर्म किए जा, फल की इच्छा मत कर, थोड़ा funny लगता है। पर यह सच है। जो लोग सिर्फ कोशिशों की तरफ ध्यान देते है वो बुलंदियों को छू पाते हैं।
ध्यान यदि result की तरफ होगा, पता नहीं मैं जीतूंगा की नहीं। वे निश्चित ही हार जाते हैं। उनका focus सिर्फ अपने लक्ष्य पर पूरी तरह से होना चाहिए

सबसे बड़ा रोग, क्या कहेंगे लोग

जो लोग सिर्फ लोगो को दिखाने के लिए या लोगो से डर कर मेहनत करते हैं। वे अक्सर असफल होते हैं। हमे अपने कार्य पर ध्यान देना चाहिए। लोग जीतने पर भी कहते है और हारने पर भी। इस डर से हम अपना 100 percent नहीं दे पाते।

डर के आगे जीत है

हमे डर के कभी भी काम नहीं करना चाहिए। मै फेल हो गया तो, मै ये काम नहीं कर पाया तो, मेरा क्या होगा। ये सब फालतू के खयाल जिसमें सिर्फ अनुमान के आधार पर आप डरते रहते है। कॉन्फिडेंस से बिना डरे काम करने से जीत पक्की है।

धेर्य रखे

मेहनत के साथ हमे बहुत सारा पेशंस रखना सीखना चाहिए। यदि हम सही तरीके से अपना काम कर रहे हैं तो हमें सफलता जरूर मिलेगी।
एक दो बार यदि आप फेल हो भी जाए तो हार कर बैठ नहीं जाना चाहिए बल्कि फिर से प्रयास करना चाहिए।
क्यूंकि
मन के हारे, हार है
और मन के जीते, जीत”

विश्वास

खुद पर हो विश्वास और मन में हो आस्था, फिर कितनी भी आजाए बाधाएं, मिल ही जाता है रास्ता। अपने Subconscious Mind में ये विश्वास रखे कि जो आप कर रहे है, उसमे जरूर सफल होंगे।

अंततः तब तक सफल होने के लिए प्रयासरत रहे जब तक कि आप अपनी मंजिल पा ना ले।
एक हारे हुए और जीते हुए इंसान में यही फर्क है। हारने वाला वहां जा कर हिम्मत छोड देता है जहां से उसकी जीत होने ही वाली थी। बस एक कदम और आगे बढ़ना था।

Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *