क्यों periods मे घर का काम करना और मंदिर जाना वर्जित है ?

पहले जानते हैं इस तथ्य को कि पीरियड्स होते क्या हैं ?



माहवारी यानि पीरियड्स (periods in hindi) महिलाओं में होने वाली एक प्राकृतिक क्रिया है । Puberty ( teenage ) के दौरान लड़कियों में होने वाला शारीरिक बदलाव है माहवारी का शुरू होना |

प्यूबर्टी एक ऐसा समय है जब बच्चों के प्रजननीय अंग पूरी तरह से विकसित हो जाते है और वे प्रजनन के भारत लिए सक्षम हो जाते है | युवा लड़कियों में जब यह पड़ाव आता है तब उनके मासिक धर्म (menstruation ) शुरू हो जाते है | इसका मतलब यही है कि अब उनका शरीर प्रजनन करने के योग्य हो चुका है |

जानते हैं क्यों पहले की महिलाओं  को घर में ही रहना पड़ता था

पहले का जमाना आज कि तरह नहीं था जहां हर तरह की सुविधा उपलब्ध हो। पहले sanitry pads की जगह घर की महिलाएं कपड़ा ही काम में लाती थी। इस वजह से उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।

इन सब कारणों की वजह से उन्हें किचन में जाने की आज्ञा ना थी, ऐसा नहीं है कि वे अछूत थी, बल्कि इस समय तो वे सबसे ज्यादा शुद्ध ही होती थी क्यूंकि जो रक्तस्राव उस वक्त होता है, यदि वह ना हो तो उसी से एक जीव का निर्माण होता है।

वास्तविकता में अगर कुछ ज्ञानियों की मानी जाए तो माहवारी के दौरान स्त्री में इतनी ज्यादा ऊर्जा होती है कि वह देवी – देवताओं पर भी भरी पड़े। महिलाओं का घर में रहने का मुख्य कारण उनका स्वयं को बीमारियों से दूर रखना ही था। Hygien के तौर पर सोच कर ही उन्हें घर में रहने की सलाह दी जाती थी, जिससे वो किसी संक्रमण का शिकार ना हो जाए

आज के जमाने की तरह पहले सुविधाओं के अभाव में उन्हें किचन में काम करने से रोका जाता था। इस तरह जो मुश्किल दौर से वो गुजरती है उसमे उन्हें आराम भी मिल जाता था। वैसे भी महिलाओं को कभी भी काम से अवकाश नहीं मिलता, तो यह एक रास्ता था, उनको आराम देने का। आज भी कई घरों में यह परंपरा बरकरार है।

मंदिर में जाना क्यों वर्जित है ?

1. विद्वानों के अनुसार जब एक महिला पीरियड्स में होती है तो उसके अंदर की energy नीचे की ओर प्रवाहित होती है, जबकि मंदिर और ऐसे ही पूजा स्थलों में energy नीचे से ऊपर की ओर. जिस वजह से महिलाओं को ज्यादा कष्ट होता है।

2. ऐसा माना जाता है कि जिस वक़्त महिला पीरियड्स में होती है वे एकदम शुद्ध होती है साक्षात् देवी का रूप . मंदिर में भगवान के सामने जाने से भगवान की ऊर्जा और दिव्यता भी उन्हीं में आ जाती है, जिस वजह से उनका मंदिर में जाना वर्जित हो जाता है।

3. मासिक के दौरान वे इतनी ज्यादा संवेदनशील होती है कि हर प्रकार की energy उनकी तरफ आकर्षित होती है, जिस वजह से भी उनका मंदिर में प्रवेश निषेध हो जाता है।

मूलतः भले ही लोग मासिक धर्म पर जुड़े अंधविश्वास को खराब नजरों से देखें पर वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार पूरे समय में महिलाये काम करने के दौरान काफी थक जाती हैं और इस समय के दौरान उन्हें आराम करने दिया जाना चाहिए।

आज समय में बदलाव के कारण लोगों के काम करने के तरीकों में बदलाव आया है और आज की महिलायें तकनीकी चीजों से पूरी तरह से जुड़ चुकी है। आज उन दिनों के लिए पूर्ण साधन सुलभ है। अब आज के समय की महीलायें चार दिवारी से निकल कर स्कूल, कॉलेज दफ्तर आदि के लिए बाहर जाती है। 

आज पहले जितना जटिल काम नहीं रह गया है, इसलिए अब उन्हें ज्यादा आराम की जरूरत नहीं पड़ती। समान्य रूप से वो पूरे महिने अपना काम कर लेती है। इन तथ्यों पर गौर करके हमें जीवन शैली में बदलाव लना चाहिए और periods को सही तरीके से समझना चाहिए। यह महिलाओं में होने वाली साधारण प्रक्रिया है, कोई छुआछूत की बीमारी नहीं।


Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *