क्यों हर साल गणेश चतुर्थी पर गणेशजी को घर लाते है?



यह तो सभी जानते है कि विघ्नहर्ता गणेशा के बिना किसी प्रकार का कार्य आरंभ नहीं होता। हमारे हर शुभ कार्य का श्री गणेश, प्यारे गणेशजी की पूजा से ही होता है।

देवताओं में अग्रपूज्य रिद्धि-सिद्धी दाता गजानन की कृपा हम सब पर बनी रहे, इसलिए भाद्रपद शुक्लपक्ष की गणेश चतुर्थी पर गणेश झांकी लगाई जाती है. पूजा अर्चना स्थापना की जाती है।

मूलाधार चक्र के स्वामी – श्री गणेश

गणपति जी हमारे विचारो के अधिष्ठाता होते हैं। हमारे सप्त चक्रों में से एक चक्र, मूलाधार चक्र है, जिसके स्वामी श्री गणेश जी हैं। जो भी आचरण हम करते हैं उनके स्वामी श्री गणेश जी है।

हर कार्य मंगलमय हो इसी भावना की पुष्टि के लिए हम श्री गणेश जी की सर्वप्रथम आराधना करते है।
और इसी कारण हमारा हर कार्य निर्विघ्न हो जाता है।

किन्तु सवाल ये है कि जब गणेशजी हमारे घर में पहले से ही मूर्ति रूप या फोटो के रूप में विराजमान होते है, तो फिर गणेश मूर्ति घर बैठाने की प्रथा क्यों आरंभ हुई?

गणेश मूर्ति स्थापना और विसर्जन की कथा!

मेरे सदगुरु श्री श्री अनिरुद्घा के श्री मुख से वर्णित ये कथा आपको सुनाती हूं।

जब लोग दतात्रेया जी की माता अनुसूया साक्षात् मां जगदम्बा के पास अपने कष्टो और कुविचारों के निवारणार्थ आने लगे, तब मां अनुसूया ने पहली बार गणपति जी की मूर्ति भ्रशुंडी ऋषि को प्रदान की।

महान ऋषि भ्रूशुंडि

भ्रशुंडि ऋषि राम भक्त और गणेश जी के परम भक्त थे। वे हजारों सालो की तपस्या करके मां अनुसूया के पास आए। उन्होंने मां से यही मांगा की लोग अपने कष्टों के लिए मां के पास आते है, उनके कष्ट वे पहले सुने और दूर करने का प्रयत्न करें।

तब मां ने उन्हें एक दर्पण के समक्ष तब तक बैठने को कहा, जब तक कि उन्हें दर्पण में उनके सिवा कोई और दिखने लगे। तब हरी ओम का उच्चारण करना।

21 साल तक भ्रुशुंडी ऋषि दर्पण के सामने बैठे रहे और तब उन्हें साक्षात् श्री गणेशजी के दर्शन हुए। श्री गणेशजी ने पूछा क्या मै आपके गृह में प्रवेश कर सकता हूं।

गणेश जी का आगमन

यह सुन कर ऋषिवर अति प्रसन्न हुए और उन्होंने कहा प्रभु आपका स्वागत है। यह दिन था भाद्रपद शुक्लपक्ष की गणेश चतुर्थी का। ऋषिवर ने श्री गणेश जी से प्रार्थना की, की हे प्रभु जैसे आप मेरे घर आए, उसी तरह सभी के घर विराजमान हो।

श्री गणेश जी बोले कि जो भी मनुष्य मुझे इस दिन अपने घर मूर्ति रूप में पूर्ण भक्ति भाव से लाएगा, मै उसके घर साक्षात् स्वयं रहूंगा।

पहले के समय 21 दिन तक मूर्ति पूजन हुआ करता था। फिर यह 10 दिन के लिए होने लगा। फिर 5 दिन और अब डेढ़ दिन का। सभी अपनी सुविधा अनुसार गणपति जी को बैठाने लगे। और उस दिन से यह प्रथा आरंभ हुई।

ऐसी मान्यता है कि गणेश चतुर्थी के चौथे दिन मां गौरी आती है और दसवें दिन शिव शंकर उन्हें वापस लिवा ले जाने के लिए लाए जाते हैं।
11 वें दिन पूरे गणेश परिवार का पूर्ण हर्षोल्लास से विसर्जन किया जाता है। प्यारे श्री गणेश जी को के अगले वर्ष आने के न्योते के साथ इस पर्व का समापन होता है।

गणेश जी को घर लाए तो क्या करें?

श्री गणेशजी जी की पूर्ण विधि विधान से स्थापना करें।
प्रसाद बनाए और पूर्ण भक्तिभाव से आतिथ्य करें।
गणेश जी को मोदक अति प्रिय है।

यह भोग लगाने के साथ ही गणपति जी के समक्ष कुछ समय बैठे जरूर। उनसे बाते करे। उनसे पूछे, उन्हें मोदक कैसे लगे! यह विश्वास रखे कि स्वयं गणेशजी आपके मोदक खा रहे हैं।

पूर्ण भक्ति भाव से उन्हें रिझाए। मंगलमूर्ति आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगेें। यही विश्वास सदैव अपने मन में रखें
ओम श्री गणेशाय नम:

अक्सर हमारी हिन्दू रीतियों में भगवान की प्रतिमा लाने से पूर्व यह सोच विचार किया जाता है कि प्रतिमा कहा लगाई जाएं अथवा किस तरह की लाई जाएं । साथ ही जानिए किस तरफ सूंड वाले गणेशजी शुभ होते हैं



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