किस तरफ सूंड वाले गणेशा शुभ है ?

अक्सर हमारी हिन्दू रीतियों में भगवान की प्रतिमा लाने से पूर्व यह सोच विचार किया जाता है कि प्रतिमा कहा लगाई जाएं अथवा किस तरह की लाई जाएं ।

जब भी हम  श्री गणेश की प्रतिमा की स्थापना अपने घर में करने का विचार करते है, तो सर्वप्रथम यही ख्याल आता है कि  सूंड किस तरफ होनी चाहिए? 

क्या कभी आपने ध्यान दिया है कि भगवान गणेश की तस्वीरों और मूर्तियों में उनकी सूंड दाई या कुछ में बाई ओर होती है ? सीधी सूंड वाले गणेश भगवान दुर्लभ हैं। इनकी एक तरफ मुड़ी हुई सूंड के कारण ही गणेश जी को वक्रतुण्ड कहा जाता है।

भगवान गणेश के वक्रतुंड स्वरूप कई हैं। जैसे कि कुछ मूर्तियों में गणेशजी की सूंड को बाई ओर घूमा हुआ दर्शाया जाता है तो कुछ में दाई ओर। गणेशजी की अधिकतर मूर्तियां सीधी या उत्तर की ओर सूंड वाली होती हैं। 

मान्यता

मान्यता है कि गणेशजी की मूर्ति आपको दक्षिण की ओर मुख वाली मिल जाए उसकी विधिवत प्रतिष्ठा और उपासना की जाए तो मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। गणपति जी के बाईं सूंड में चंद्रमा का प्रभाव और दाईं सूंड में सूर्य का प्रभाव माना गया है।

प्राय: गणेशजी की सीधी सूंड तीनो दिशाओं से दिखती है

बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली मूर्ति को इड़ा नाड़ी व चंद्र प्रभावित माना गया है। ऐसी मूर्ति की पूजा स्थायी कार्यों के लिए की जाती है जैसे शिक्षा, धन प्राप्ति, व्यवसाय, उन्नति, संतान सुख, विवाह, सृजन कार्य और पारिवारिक खुशहाली।

सूंड दाईं ओर घूमी होती है तो इसे पिंगला स्वर और सूर्य से प्रभावित माना गया है। ऐसी प्रतिमा का पूजन विघ्न-विनाश, शत्रु पराजय, विजय प्राप्ति, उग्र तथा शक्ति प्रदर्शन जैसे कार्यों के लिए फलदायी माना जाता है। 

सीधी सूंड वाली मूर्त का सुषुम्रा स्वर माना जाता है और इनकी आराधना रिद्धि-सिद्धि, कुण्डलिनी जागरण, मोक्ष, समाधि आदि के लिए सर्वोत्तम मानी गई है। संत समाज ऐसी मूर्त की ही आराधना करता है। 

सिद्धि विनायक मंदिर में दाईं ओर सूंड वाली मूर्त है इसीलिए इस मंदिर की आस्था और आय आज शिखर पर है।

कुछ विद्वानों का मानना है कि दाई ओर घुमी सूंड के गणेशजी शुभ होते हैं तो कुछ का मानना है कि बाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी शुभ फल प्रदान करते हैं।

स्थापना

यदि गणेशजी की स्थापना घर में करनी हो तो दाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी शुभ होते हैं। दाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी सिद्धिविनायक कहलाते हैं।

मान्यता है कि इनके दर्शन से हर कार्य सिद्ध हो जाता है। किसी भी विशेष कार्य के लिए कहीं जाते समय यदि इनके दर्शन करें तो वह कार्य सफल होता है शुभ फल प्रदान करता है। इससे घर में पॉजीटिव एनर्जी रहती है व वास्तु दोषों का नाश होता है।

घर के मुख्य द्वार

बाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी की स्थापना करनी चाहिए। बाई ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी विघ्नविनाशक कहलाते हैं।

इन्हें घर में मुख्य द्वार पर लगाने के पीछे तर्क है कि जब हम कहीं बाहर जाते हैं तो कई प्रकार की बलाएं, विपदाएं या नेगेटिव एनर्जी हमारे साथ आ जाती है।

घर में प्रवेश करने से पहले जब हम विघ्नविनाशक गणेशजी के दर्शन करते हैं तो इसके प्रभाव से यह सभी नेगेटिव एनर्जी वहीं रूक जाती है और हमारे साथ घर में प्रवेश नहीं कर पाती।

यहां मुख्यत तर्क यह है कि गणेश भगवान की किसी भी ओर सूंड वाली मूर्ति शुभ फलदायक ही है, अत: मनुष्य को चाहिए कि वह शुभ मन से, श्रद्धा और विश्वास पूर्वक प्रभु को अपने घर में ही नहीं अपितु अपने हृदय में विराजमान करे और सदैव यह निष्ठा रखे जो भी प्रभु करेंगे वह अच्छा ही होगा। सबके मत भिन्न तो होंगे ही पर गणेश एक ही है।

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