डर क्यों लगता है?

भय तथा असुरक्षा क्या है? क्या वास्तव में डर जैसी कोई चीज होती है या इसकी उपज हमारे दिमाग ने की है।

वास्तव में अगर हम देखेंगे तो भय का कोई अस्तित्व ही नहीं है। हम इसे अपने अचेतन में निर्मित किए जा रहे है। अगर हम इसे निर्मित ना करे तो वास्तव में इसका कोई अस्तित्व नहीं है।

सर्वप्रथम हमें यह समझना होगा कि हमें भय क्यों लगता है?

हमारे भीतर भय होने का मुख्य कारण असुरक्षा है।

अगले ही पल क्या होगा, या ऐसा करूंगा तो लोग क्या कहेंगे, असफल होने का डर। बहुत सारे भिन्न – भिन्न कारण होते हैं, जिसकी वजह से लोग डरते हैं।

एक भौतिक शरीर के रूप में हम खुद को पहचानते हैं। अपने जीवन का अनुभव हम अपनी शारीरिक तथा मानसिक क्षमताओं तक सीमित कर देते है।
इसी कारण हमे भय तथा असुरक्षा होती है।

आज अगर हमारे साथ कुछ सुंदर घटित हो जाता है, तो हम अपनी असुरक्षा को भूल जाते हैं। लेकिन कल यदि परिस्थितियां विषम हो जाएं, तो हमे फिर से वह असुरक्षा सताने लगेगी जो हमारे भीतर भरी है।

डर से बचने के उपाय !

डर को समझे

जब हम किसी परिस्थिति में उलझते हैं हम डरने लगते है। मान लीजिए आप एग्जाम देने जा रहे हैं और आप, पास होंगे कि नहीं, इस बात से डर रहे हैं।

इस स्तिथि में आपको यह समझना होगा कि यहां डरने से कुछ नहीं होगा। जिस प्रकार से आपने मेहनत कि होगी परिणाम मिल जाएंगे।

डर को अस्वीकार करे

पहले से ही हम लोगो की यह मानसिकता होती है कि हमे डर लगता हैं। पूर्व में हुए अनुभव के आधार पर हम डरने लगते है। हमे यह समझना होगा हर बार परिस्थिति एक जैसी नहीं होती।
यदि ऑफिस में कार्य पूरा नहीं हुआ तो बॉस डांटेंगे, इस बात का डर। इस डर से हम अपना कार्य पूरी क्षमता से नहीं करते और परिणाम अपेक्षित नहीं होते।

खुशी और प्यार से काम करे

कोई भी काम जो आपको खुशी देता हो, वहीं काम करना चाहिए। खुश होकर काम करने से भय नहीं लगता कि वह अच्छा होगा कि नहीं। सौ प्रतिशत परिणाम अच्छे ही होंगे क्यूंकि वह आप खुश होकर कर रहे है। प्यार से कर रहे हैं।

अपेक्षाएं और तुलना ना करे

बहुत ज्यादा अपेक्षाएं और हर चीज में तुलना करने से दुख होता है और डर बढ़ता है।
यदि माता – पिता अपने बच्चो से बहुत ज्यादा अपेक्षा करेंगे तो बच्चो में डर बढ़ेगा। वे जीवन में सिर्फ रेस में भागने वाले घोड़े की तरह ही जीना सीखेंगे।
उन्हें जीवन उनकी तरह से जीने कि स्वतंत्रता दीजिए, डर छुएगा भी नहीं उन्हें।

भय का सामना करना ही भय पर विजय प्राप्त करना है।
भय जैसा कुछ नहीं होता यह समझना ही भय को दूर भगाना है।

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