जनाब ये बातें हैं, बातों का क्या!


जो जान गए इस बात को, ये बात नहीं कुछ काम की
फिर क्यों खींचे जाते हो बेवजह ,जब हैं ये बेकार की

बातें बड़ी होंगी, जब तूल देते जाओगे,
अब तुम्हे ही तय करना है कि रिश्ता बड़ा या बातें ही

जो चुभ भी जाएं शब्द कोई तो अपने मन में घर ना करो
कह के, सुन के, मान के, मना के बस बात वहीं बंद करो।

कहो तकलीफ सदा उसी से, जिससे हुई है तकलीफ कोई
गर दुनिया भर को बताओगे, तो क्या ये कोई बात हुई

दुनिया का तमाशा समझोगे तो जल्द पता चाल जाएगा
ये लोग है वो, जिनकी गाड़ी, चुगलियों के बिना चलती नहीं

रिश्तों की समझ करना सीखो ये लौट के फिर नहीं आते हैं,
जो गांठ पड़ जाए एक बार, तो जोड़े नहीं जुड़ पाते हैं।

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