खुद में बदलाव लाए, बच्चो में बदलाव देखे

अक्सर हम ये कहते और सुनते है, मेरा बच्चा मेरी बात नहीं सुनता। उसे जो भी कहो वह उसका उल्टा ही करता है। आजकल के बच्चे बड़ों का सम्मान करना नहीं जानते वगैरह – वगैरह .पर क्या आपने कभी ये जानने की कोशिश की है कि वह ऐसा क्यों कर रहा है।

आइए जानते है कुछ तत्थय जो यह बताते है कि वो किस स्तिथि में ऐसा करते है

  • जब आप उसे हर चीज के लिए सिर्फ ना बोलते है।
  • जब वह कुछ नया करता है, और आप उसे प्रोत्साहित नहीं करते।
  • उसे बोलते तो है कि बड़े हो जाओ, लेकिन जब वह कुछ निर्णय लेना चाहता है तो आप ही उसे यह कह कर चुप करा देते है कि तुम इतने बड़े नहीं हुए अभी।
  • जब आप उससे उसकी क्षमता से ज्यादा उम्मीद करते हैं, या फिर उसकी क्षमता से कम उसे आंकते हैं।
  • जब आप स्वयं वह काम करते हो जो गलत है और बच्चे को वही करने पर डांटते है, जैसे कि किसी को झूट बोलते है और बच्चा ऐसा करे तो उसे दण्ड देते है ।
  • दूसरों के सामने उसे डांटते या मारते है।
  • जब आप उसे समय नहीं देते,उसके साथ कभी खेलते नहीं है।
  • जब उसे बोलते है कि कुछ अच्छा करने पर उसे इनाम मिलेगा और फिर उसके अच्छा कर देने पर भी उसे ईनाम नहीं देते या उस वक़्त ना देकर बाद में देते हैं।

ध्यान देने योग्य बात, जो बदल देगी आपके बच्चे का व्यवहार

बच्चे को बदलने से पहले खुद को बदले, क्यूंकि बच्चे वहीं सीखते हैं जो वे देखते है, जैसे यदि आप एक छोटे बच्चे को यह नहीं सीखते की दरवाजा कैसे खोलना है, खिड़की कैसे बंद करनी है, यह सब करना वह देख कर ही सीखता है।
तो बच्चे पर नजर रखने से पहले ये सुनिश्चित कर लें कि ऐसा कुछ गलत तो नहीं जो आप कर रहे हैं, और बच्चे आपको copy

कुछ बातें जो आपके बच्चे के संस्कार बनाती है

बच्चे को गले लगाइए

जब भी आप घर में प्रवेश करते हैं, अपने बच्चे को गले से लगाइए, यह प्रक्रिया रोज़ होनी चाहिए, इससे आपके बच्चे को अपनापन महसूस होगा और उसे लगेगा की आपके लिए उसकी बहुत अहमियत है।

बुराई किसी से भी मत करिए

अपने पड़ोसियों, रिश्तेदारों और दोस्तों के बारे में कोई भी बुराई किसी से भी मत करिए और ना बच्चो से इस तरह की कोई भी बात करे,  वह बहुत जल्दी बाते पकड़ते हैं।

माता – पिता के घर ले कर जाएं,

जब भी अपने माता – पिता से बात करे, बच्चो की भी बात कराए, अपने साथ हमेशा बच्चो को भी अपने माता – पिता के घर ले कर जाएं, इससे बच्चे देखेंगे की आप उनका कितना सम्मान और उनसे कितना प्यार करते हैं, और फिर वे भी ऐसा ही करेंगे आप के साथ।

motivational कहानियां सुनाए

उन्हें अक्सर motivational कहानियां सुनाए, भगवान की कथाएं जो उन्हें कुछ सीख दे, ऐसा करने पर वह परिस्थिति से कैसे लड़ना है और जीवन में कैसे आगे बढ़ना है, यह सीखेंगे।

जिम्मेदार बनेंगे

अपने घर को व्यवस्थित रखे,और स्वयं को भी, और उनसे भी यह सब कराए, ऐसा करने से वे जिम्मेदार बनेंगे और अपने आप को भी अच्छे से रखना सीखेंगे।

गलतियों को नजरंदाज करे

उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए कभी – कभी, उनकी छोटी गलतियों को नजरंदाज करे और बाद में उन्हें प्यार से समझाए।

बच्चे से क्षमा मांगे

यदि आप से भी कोई गलती हो जाए तो बच्चे से क्षमा मांगे, ऐसा करने पर वह सीखेगा की हमें गलती करने पर क्षमा मांगनी चाहिए, चाहे फिर कोई छोटा हो या बड़ा

मज़ाक ना उड़ाए

अगर उनसे कोई गलती होती भी है तो सबके सामने उसका मज़ाक ना उड़ाए, और ना ही सबके सामने उसे डांटे, यदि आप ऐसा करेंगे तो बच्चा आपका सम्मान नहीं करेगा।

वक़्त दे

बच्चे को कोई भी चीज समझने को वक़्त दे, जैसे आपको भी कई चीजें तुरंत समझ नहीं आती, वैसे ही बच्चे को भी नहीं आती, समय दे और सुधार देखे।

प्रभु को धन्यवाद देना

प्रार्थना करे, और बच्चे को भी सिखाए, की उन्हें सुबह पहले उठ कर प्रभु को धन्यवाद देना है, उसे सिखाए की हमें हमेशा दूसरों के काम आना चाहिए ,मानव जीवन का अर्थ सेवा है, सिर्फ अपना ही स्वार्थ ना देखा, इससे बच्चे में leadership skills विकसित होती है।

concrete plan

सुबह उठ कर रोज़ उनसे पूछे कि आज पूरा दिन वह क्या करने वाले है, क्यूंकि बिना concrete plan के वे कुछ भी करेंगे और समय व्यर्थ गवाएंगे, तो आपको उसे ये सिखाना पड़ेगा की रोजमर्रा में हमें अपने कार्यों को जो हमने सुबह ही निर्धारित कर लिए थे, वे उसी दिन पूरे करने चाहिए।

अंततः उन्हें दे positive blessings, आपके आशीर्वाद से ही वे जीवन में आगे बढ़ पाएंगे .यदि आप उन्हें कोसते रहेंगे तो वे कुछ नहीं कर पाएंगे, इसलिए उन्हें अच्छा इंसान बनाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित करे. उन्हें आशीर्वाद दे, पहले स्वयं अच्छे बने, फिर उनसे अपेक्षा करे।

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