Superstition (अंधविश्वास क्या होता है)?

अक्सर आपने लोगों से कहते सुना होगा, बिल्ली रास्ता काट गई या छींक आ गई अब घर से बाहर जाना शुभ नहीं और इसी तरह की बातें जिसका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं।


आखिर ऐसा सब किसने बताया ? क्या प्रमाण है इन सब तथ्यों के पीछे?

आइए जानते है आखिर ये अंधविश्वास है क्या?

Cortical diffusion

हमारे दिमाग को हर चीज में pattern बनाने की आदत होती है। Scientificaly इसे समझे तो हमारे दिमाग की pattern बनाने की खूबी को cortical diffusion कहते है। इसमें neurons cell एक दूसरे को गलत signal देते हैं जिसकी वजह से हमारे दिमाग में एक picture बन जाती है।

सरल भाषा में समझे तो मान लीजिए आपने एक ग्लास में स्याही की कुछ बूंदे डाली। अब आपका दिमाग एक picture बनाएगा जिसमें आपको एक blue circle दिखेगा। अब भले ही वह circle पूरा बना हो ना हो, वह पूरा बना हुआ ही दिखेगा।

Framing pattern

दिमाग हमेशा logic ढूंढ़ता है। किसी भी अधूरी पिक्चर को किसी ना किसी pattern से पूरी करने की कोशिश करता है। Superstition आपके दिमाग में घुसा एक बहुत गहरा विश्वास है जिसका सच्चाई से कोई लेना देना नहीं।

Unrealistic logic

lucky number, शुभ कार्य में जाने से पहले दही खाना, धन के लिए laughing buddha घर में लाना, वगैरह – वगैरह।

ऐसे ही बहुत सारे unrealistic logic जिसका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है। ये हमारे दिमाग का बनाया हुआ एक पैटर्न होता है जिसे हम सच मान लेते हैं।

BELIEF SYSTEM

Rituals, Beliefs and Habits – जी हां Ritual, Belief and Habit का नाम ही superstition है। इसे उदाहरण से समझते हैं – पहली बार जब आपने वर्ल्ड कप देखा होगा तो जीत भारत कि हुई होगी।

BELIEF – उस दिन जो शर्ट आपने पहनी होगी वह अब आपकी lucky shirt बन जाएगी और हर बार आप मैच देखते वक़्त वहीं shirt पहनेंगे। यह आपका belief बन जाएगा जिसका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं।

Magic trick

इसे एक magic trick से समझते है जो अक्सर आपने देखी होगी। कुछ लोग इस magic trick से आपको बेवकूफ बनाते हैं और यह भी एक अंधविश्वास ही है।

वे ताश की गड्डी में से आपको एक पत्ता चुनने को कहते हैं . फिर वही पत्ता निकालकर आपके सामने रखते है। 
असल में जब वे आप को पत्ते दिखा रहे होते हैं तो बीच में थोड़ा रुकते हैं। बस वही आपका दिमाग उस पत्ते को अपने अंदर read कर लेता है .जो पत्ता आपको सामने वाला दिखा रहा है। सामने वाले को पता होता है क्यूंकि ये उसकी ही चाल है जिसे आप magic समझ लेते हैं।

अब आप जान ही गए होंगे कि superstition का reality से कोई लेना देना नहीं। यह तो हमारा दिमाग है जो हर चीज में logic ढूंढ़ता है और हर खाली चीज को भर कर उसकी कोई न कोई आकृति बना लेता है।

FACT

अक्सर astrologers भी यही करते है क्यूंकि 80 प्रतिशत लोगों की  lifestyle एक जैसी ही होती है। हर इंसान पूर्णतः सुखी या दुखी नहीं होता। Astrologer अमूमन वहीं बातें बोलते हैं जो सब के जीवन में घटित होती है और हम उसे सच मान लेते है।






Add a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *