मेहनत के बाद भी असफलता क्यों मिलती है?

दोस्तों पहले तो हमे ये समझना चाहिए कि हम किसी भी सूरत में असफल नहीं होते । हम जो भी काम करते है वो पूरा ना होने पर कुछ नहीं तो उससे सीख लेते हैं।

चलिए वही पुरानी खरगोश और कछुए कि कहानी से समझते हैं

जैसा कि आप सब जानते हैं कि कछुआ जीत जाता है और खरगोश हार जाता है। क्या ये संभव हो पाता अगर खरगोश सोता नहीं। यही बात वह खरगोश सोचता है और एक दिन कछुए के पास जाकर कहता है।

भैया मै चाहता हूं कि हम फिर एक बार race करे, और कछुआ तैयार हो जाता। इस बार जीत खरगोश की होती है।
इस बात का कछुए को बहुत दुख होता है और वह फिर से खरगोश को चुनौती देता है। खरगोश तैयार हो जाता है पर कछुआ कहता कि रास्ता मै तय करूंगा। अब खरगोश तो over confidence में होता ही है सो हा कह देता है

कछुआ पानी का रास्ता तय करता है और जीत जाता है चूंकि खरगोश को तैरना नहीं आता वह हार जाता है।

तो इस तरह से कछुआ एक बार और जीत जाता है।
दोस्तो इस कहानी से हमे ये समझना चाहिए कि सफलता यदि एक रास्ते से नहीं मिल रही तो और भी बहुत रास्ते होते है। हमे थक कर हार कर बैठ नहीं जाना है बल्कि वो दूसरे विकल्प ढूंढने है जिससे हम बुलंदियां छू सके।

Be Happy

हमे ये भी समझना होगा कि हर काम हर व्यक्ति के लिए नहीं होता। आपने कोशिश की आप असफल हुए आपने बहुत सारी सीख ली और आगे बढ़े।

दूसरे विकल्पों की ओर देखा और बुलंदियां हासिल की।
खुशी से किए हुए काम में आपका ध्यान सीखने पर जाता है। आप उसे पूरी लगन से करते हैं और कामयाब भी होते हैं।

Consistency

दोस्तो जो व्यक्ति लगातार बिना रुके सीखता रहता है और प्रयत्नशील रहता है वह जिंदगी में कुछ ना कुछ तो कर ही लेता है। बिना कुछ किए हारने से अच्छा तो करके हारना है।
और सही मायने में हारना नहीं सीखना है।


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