क्या ये वही जनता है ?!

क्या ये वही जनता है, जो मोर्चे बड़े लगाती है
प्रशासन ये नहीं करता, वो नहीं करता
यही हर वक़्त जताती है।

जो खुद से कभी ना कुछ करना जानती
बस दोष देती जाती है
मोनेटाइजेशन, 370, लॉकडाउन को सह नहीं पाती है।

जब बारी अब तुम्हारी आई
तो क्यों नहीं बुद्धि चलाई जाती है
हर वक़्त उलाहना देने वाली
खुद को घर में रोक नहीं पाती है

क्या तमाशा कोई चल रहा है
या भीड़ इकट्ठे करने का ही शौक रखते हो
अरे इतने ही सही हो तो
क्यू अक्ल तुम्हे नहीं आती है

एकता की बड़ी डींगे हांकने वालों
तुम्हे दूसरों की कभी फिक्र ना थी
अरे अपने लिए ही सही ये समझ कर
खुद को क्यू नहीं समझाते हो

बस भी करो !!!और समझ जाओ
कोई मज़ाक नहीं चल रहा है
गर कल का सूरज देखना हो
तो रहना सीखो घर में ही
अगर करना चाहते हो कुछ अच्छा
तो दुआ करो सब ठीक हो
फिर पहले जैसी सुबह हो
फिर वही हसीन शाम हो 



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